आत्मविशवास
आत्मविशवस
चल उठ मुझे कुछ ऐसे जगा,जैसे तेरा आज हूँ मैं ।
आ उठ मुझे तू पहन जरा जैसे तेरे सर का ताज हूँ मैं।
खोज मुझे अपने में तू,जैसे खोई तस्वीर कोई।
फिर रुकने नही पायेगा तू,जैसे जाग उठी,सोई तकदीर कोई।
चल उठ मुझे ______ताज हूँ मैं।
जगा मुझे,मैं हूँ कोई आग दबी,पायेगा खुदको खुदमे तू भी कहीं।
सोगया तो दब जाऊँगा,जेसे ना सुल्गी कोई आग कभी।
मैं हूँ चिंगारी लगजाऊ तो,फिर फैलू ऐसे के बुझने का नाम नहीं।
चल उठ मुझे________ताज हूँ मैं।
दर दर ढूँढे हे क्यों मिझको,मैं बसा तुझमें ही कहीं।
हरा क्यों है,टूटा क्यों है तू?जैसे सूखी ड़ाल कोई।
बड़ आगे,उठ कुछ ऐसे,जैसे नदिया में उफान कोई।
चल उठ मुझे___ताज कोई।
कल तक खोया था जो तुने वो ही आत्मविशस हूँ मैं ।
हरा क्यों है,टूटा क्यों है तू?जैसे सूखी ड़ाल कोई।
बड़ आगे,उठ कुछ ऐसे,जैसे नदिया में उफान कोई।
चल उठ मुझे___ताज कोई।
कल तक खोया था जो तुने वो ही आत्मविशस हूँ मैं ।
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